बावरा दिल मेरा,
ना जाने कब बहल जाता हैं,
सुन किसी और के दिल की धड़कन
खुद ही पिघल जाता हैं।
नटकट, नादान सा,
हर किसी को अपना मानता
पर पगला दुनियां की भीड़ से
बिल्कुल अंजान सा।
कोशिश मेरी कि,
उसको लगाम दू।
सोचता हूं कि
उससे बंधनों में बांध दू।
डरा धमाका के उससे
उसे इस दुनिया का ज्ञान दू।
बावले दिल को मैं,
एक कुबशुरत सा संसार दू।
जहां कर सके वो नादानीया
कुछ ऐसा बगान दू।
थोड़े ना दिल को मेरे
ऐसा एक साथ दू।
जिससे पकड़ कर के जी सके
ऐसा एक हाथ दू।
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